रुड़की:- पुरानी गंगा नहर रुड़की में बिना विभागीय अनुमति के नावों का संचालन किए जाने के मामले में सिंचाई विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तरी खंड गंगा नहर, रुड़की के कार्यालय से जारी नोटिस में संबंधित व्यक्ति को बिना अनुमति नाव संचालन तत्काल बंद करने और विभागीय भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो नियमानुसार कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
जिलेदार आराजी-प्रथम, उत्तरी खंड गंगा नहर, रुड़की की ओर से जारी नोटिस दिनांक 5 अगस्त 2026 का है। नोटिस में कहा गया है कि पुरानी गंगा नहर रुड़की में बिना विभागीय अनुमति के नावों का संचालन किया जा रहा है। विभाग ने इसे उत्तरी भारत एवं जल निकास अधिनियम-8, सन 1873 की धारा-70 के अंतर्गत अपराध बताया है।
नोटिस में संबंधित पक्ष को निर्देशित किया गया है कि बिना विभागीय अनुमति के अवैध रूप से संचालित की जा रही नावों के संचालन को तीन दिवस के अंदर बंद किया जाए। इसके साथ ही विभागीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण को भी हटाकर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि नोटिस के बाद भी नावों का संचालन बंद नहीं किया गया अथवा विभागीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया गया तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, विभाग द्वारा मौके पर रखा गया सामान जब्त किए जाने की कार्रवाई भी की जा सकती है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्रवाई के दौरान होने वाले समस्त हर्जे-खर्चे की वसूली संबंधित व्यक्ति से की जाएगी।
विभाग की इस कार्रवाई के बाद पुरानी गंगा नहर क्षेत्र में बिना अनुमति संचालित होने वाली गतिविधियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभाग ने अपने नोटिस की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई और सूचना के लिए भेजी है। इनमें सहायक अभियंता-तृतीय, उत्तरी खंड गंगा नहर रुड़की तथा उपखण्ड अधिकारी, उत्तरी खंड गंगा नहर रुड़की शामिल हैं।
गौरतलब है कि रुड़की की पुरानी गंगा नहर क्षेत्र में पर्यटन और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां समय-समय पर लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती हैं। ऐसे में विभागीय अनुमति के बिना नाव संचालन का मामला सामने आने के बाद सिंचाई विभाग ने अब नियमों के पालन को लेकर सख्ती दिखाई है। विभाग के नोटिस से साफ है कि नहर और विभागीय भूमि पर किसी भी तरह की गतिविधि संचालित करने से पहले संबंधित विभाग से अनुमति लेना जरूरी होगा।
अब देखना होगा कि नोटिस मिलने के बाद संबंधित पक्ष द्वारा तीन दिन की निर्धारित अवधि में नाव संचालन बंद करने और विभागीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई की जाती है या फिर सिंचाई विभाग अपने स्तर से आगे की कार्रवाई करता है।
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